Rajesh Exports पर SEBI का बड़ा एक्शन: ₹15.15 लाख करोड़ के Revenue Misrepresentation का मामला क्या है?

नमस्कार दोस्तों। आज बात एक ऐसी खबर की, जिसने पूरे शेयर बाजार और गोल्ड इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। भारत की जानी-मानी ज्वेलरी और गोल्ड कंपनी Rajesh Exports अब मार्केट रेगुलेटर SEBI की एक गंभीर जांच के घेरे में आ गई है। SEBI के अंतरिम आदेश में दावा किया गया है कि कंपनी के वित्तीय आंकड़ों में लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के Revenue Misrepresentation के संकेत मिले हैं।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे मामले की शुरुआत किसी व्हिसलब्लोअर या पूर्व कर्मचारी से नहीं, बल्कि एक आम शेयरधारक की शिकायत से हुई। 11 मार्च 2024 को SEBI को एक ईमेल मिला, जिसमें एक शेयरधारक ने कंपनी के सालों से बकाया पड़े बड़े trade receivables की ओर ध्यान दिलाया। देखने में यह एक तकनीकी सी बात लगती थी, लेकिन दो साल से ज्यादा की जांच के बाद यही शिकायत एक बेहद सख्त अंतरिम आदेश में बदल गई।

प्रारंभिक जांच के बाद SEBI ने अक्टूबर 2024 में एक जांच अधिकारी नियुक्त किया, और बाद में दिसंबर 2024 में एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी नियुक्त किया गया।

SEBI का मुख्य आरोप क्या है

अब आते हैं सबसे अहम बिंदु पर। SEBI ने आरोप लगाया है कि Rajesh Exports ने FY2020-21 से FY2024-25 के बीच subsidiaries को जिम्मेदार ठहराए गए लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू को प्रथम दृष्टया गलत तरीके से दर्शाया, जो कि कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 99.80 प्रतिशत है।

यह आंकड़ा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाइए कि आदेश में कहा गया है कि जहां कंपनी का करीब 97 से 99 प्रतिशत रेवेन्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया हो, ऐसी गड़बड़ियां बेहद गंभीर और अभूतपूर्व हैं।

विदेशी सब्सिडियरीज़ पर सवाल

मामले का केंद्र कंपनी की विदेशी इकाइयों के आंकड़ों पर है। Rajesh Exports ने SEBI को बताया कि उसकी इकाई Valcambi के स्टैंडअलोन खातों में केवल प्रोसेसिंग चार्ज और value-addition इनकम दर्ज होती है, जबकि GGR ने गोल्ड लेनदेन की पूरी सकल वैल्यू को रेवेन्यू में दर्ज किया।

लेकिन रेगुलेटर इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ। SEBI के अनुसार, कंपनी इस अकाउंटिंग ट्रीटमेंट को सही ठहराने के लिए पर्याप्त दस्तावेज, अकाउंटिंग राय, स्वामित्व रिकॉर्ड, reconciliation स्टेटमेंट या लेनदेन-स्तर के सबूत उपलब्ध नहीं करा पाई।

SEBI ने एक बेहद अहम बात कही है। रेगुलेटर ने जोर देकर कहा कि समस्या सिर्फ यह नहीं है कि आंकड़े बड़े दिखते हैं, बल्कि यह है कि बार-बार सबूत मांगे जाने के बावजूद इन रेवेन्यू को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका।

आदेश में और क्या-क्या सामने आया

SEBI के अंतरिम आदेश के मुताबिक यह मामला सिर्फ बढ़े-चढ़े रेवेन्यू तक सीमित नहीं है। आदेश में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने रेवेन्यू को गलत तरीके से दर्शाया, अहम subsidiary जानकारी का खुलासा करने में चूक की, प्रमोटर से जुड़ी इकाइयों के जरिए फंड डायवर्ट किया, और अपने विदेशी ऑपरेशन के एक बड़े हिस्से के सत्यापन में रुकावट डाली।

प्रमोटर पर प्रतिबंध

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा एक्शन प्रमोटर पर हुआ है। SEBI ने कंपनी के प्रमोटर राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी की सिक्योरिटीज में किसी भी तरह की खरीद, बिक्री या लेनदेन से, चाहे प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से, रोक दिया है। आदेश के बाद कंपनी के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला।

तो कुल मिलाकर, Rajesh Exports का यह मामला भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े कथित रेवेन्यू misrepresentation मामलों में से एक बनकर उभरा है। ₹15.15 लाख करोड़ का आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है। लेकिन एक जिम्मेदार निवेशक और दर्शक के तौर पर हमें जल्दबाजी में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए। यह एक चल रही कानूनी प्रक्रिया है, और सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही पूरी तरह सामने आएगी।

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