मद्रास हाई कोर्ट ने गौतम वासुदेव मेनन के खिलाफ आयकर अभियोजन रद्द किया। जाने क्या है पूरा मामला

मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल, 2026) को फिल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता गौतम वासुदेव मेनन के खिलाफ इनकम टैक्स (I-T) विभाग द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह कार्यवाही चेन्नई की फिल्म निर्माण और वितरण कंपनी, फोटॉन कथास प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा असेसमेंट वर्ष 2013-14 के लिए अपने I-T रिटर्न दाखिल करने में कथित विफलता के कारण शुरू की गई थी।

जस्टिस जी.के. इलंथिरैयन ने श्री मेनन की उस याचिका को मंज़ूरी दे दी, जो 2023 से लंबित थी। यह स्पष्ट करते हुए कि अभियोजन केवल याचिकाकर्ता के खिलाफ ही रद्द किया जा रहा है—क्योंकि उन्होंने 2 मई, 2011 को ही फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था—न्यायाधीश ने आदेश दिया कि कंपनी के अन्य निदेशकों के खिलाफ अभियोजन जारी रहेगा।

उन्होंने चेन्नई के एग्मोर में आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली एक अतिरिक्त ज़िला अदालत को भी निर्देश दिया कि वह इस मामले में मुक़दमे की सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी करे। याचिकाकर्ता की वकील रेवती मणिवन्नन ने अदालत के संज्ञान में यह बात लाई कि ‘फ़ोटॉन कथास’ फ़ीचर फ़िल्मों के निर्माण और वितरण के कारोबार में लगी हुई थी, और इसमें कई निदेशक थे।

आयकर विभाग ने कंपनी के खिलाफ आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 276C (जानबूझकर कर चोरी का प्रयास) के तहत मुकदमा शुरू किया था। कंपनी के अलावा, S. वेंकटरमणन, श्री मेनन, T.S.T. रामानुजम और रेशमा घाटला के खिलाफ भी मुकदमा चलाया गया, और उन्हें उन निदेशकों के रूप में पहचाना गया जो आयकर रिटर्न दाखिल न करने के लिए जिम्मेदार थे।

सुश्री मणिवन्नन ने अदालत को बताया कि श्री मेनन को 1 जून, 2010 को फ़िल्म प्रोडक्शन कंपनी में डायरेक्टर के तौर पर शामिल किया गया था, और उन्होंने 2 मई, 2011 को इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ के सामने जमा किए गए फ़ॉर्म 32 की एक कॉपी भी पेश की, ताकि अधिकारी को डायरेक्टर के इस्तीफ़े के बारे में जानकारी दी जा सके, और यह दलील दी कि उस समय याचिकाकर्ता कंपनी का डायरेक्टर नहीं था।

अदालत को बताया गया कि असेसमेंट ईयर 2013-14 के लिए रिटर्न जमा न करने के मामले में मुक़दमा शुरू किया गया था, जो फ़ाइनेंशियल ईयर 2012-13 से जुड़ा था। वकील ने कहा, “फ़ाइनेंशियल ईयर 1 अप्रैल, 2012 से शुरू होता है, लेकिन याचिकाकर्ता ने मई 2011 में ही कंपनी से इस्तीफ़ा दे दिया था,” और अदालत से गुज़ारिश की कि उसके ख़िलाफ़ चल रही सभी आगे की कार्यवाही को रद्द कर दिया जाए।

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